Sunday, May 9, 2010

सिर्फ माँ है और कोई नहीं


रिश्तों की रफूगर वो है एक जादूगर ,
वो खुसिएँ तिनका तिनका कर जोडती है ,
वो गम सूखी लकड़ी के तरह तोडती है,
वो बददूआयें सरे फूक देती है चूल्हे मे,
उसके आचल मे समाया है सूकून का हर साजो-सामान ,
उसकी डाट,उसका प्यार,उसकी लाड ,उसका दुलार ,
न सवाल ,न जबाब ,उसका प्यार बेहिसाब ,
सबका गम लेते आयी है वो अपने हिस्से ,
और बेताब रहती है खुसियाएँ बाटने को सबको ,
हमारी तोतली बोली सायानी हो गयी ,
घुटनों के बल चलने वाला बच्चा सा मै,
अब भागता हूँ इस बनावटी दुनिया मे ,
अपने पेरों पर..
पर उसके प्यार का बचपना आज भी तोतली बोली बोलता है ,
वो चूमती है मेरा माथा ,
जब मे निकलता हूँ घर से कहीं जाने को ,
कमर थोड़ी झुक गयी है ,
पर वो आज भी गोद मे उठा लेना चाहती है मुझे ,
वो सिर्फ माँ है और कोई नहीं ,
और उसके बिना ये दुनिया कुछ नहीं ....

5 comments:

कौशलेन्द्र said...

ati sundar!

merinajrmeranajria said...

accha likha hai
न सवाल ,न जबाब ,उसका प्यार बेहिसाब acchi soch k liye badhaiyan...

प्रवीण द्विवेदी की दुकान said...

thanks to all

Kumar Sambhav said...

bahut khoob dost...

mamta said...

verry good maan se badhkar koi nahi