Tuesday, May 5, 2009

बियोग के मेरे दोहे


मै तो तेरी याद मे , तड़पा सारी रात !
मुझे छोड़ सबसे मिली , तू बड़ी ख़ुशी के साथ !!

पत्ते सारे ऊड़ गए , फूल गए मुरझा !
दूर गयी तू मुझे छोड़ , मै तुझे नहीं समझा !!

तस्वीरे बेरंग थी , रंग था मेरे पास !
कूची लेकर मै खडा , मोहे तेरी आस !!

छोटी थी आखें मेरी , छोटी मेरी नीद !
सपने कैसे बड़े हो गए , मै न समझा भेद !!

तेरे सपने तेरे बातें , तू ही मेरी सांसो मे !
मौसम जैसी तू बदली , अब यादें चुभती आँखों  मे !!

मै हँसता था लोंगो पर , हालत उनकी देखकर !
मेरी हालत अब वैसी है , हँसते है वो ये कहकर !!

सपने बीधे , यादें पालीं , खुशिओं को आँसू से सीचा ! 
आयी आंधी हवा हो गए , रंग हो गया सबका फीका !!

दिन मे उलझा रातें जागीं , तेरी इस रुसवाई मे !
तू तो लेकिन खुस दिखती, अपनी इस परछाईं मे !!


2 comments:

अभिषेक said...

जीवन के वास्तविक दर्द को महसूस कराते हैं आपके दोहे...बेहतरीन लेखन...शुभकामनाएँ

pratima said...

hi.mai apki naye pathak hu.apki rachna padi.aur mahsoos kya pyar k naye rang ka bhas..khusiyo k chand lamhe aur mohabbat k dard bhare ehsaas..judai k dard ko sabdo me dhalne ka behtareen prayaas kiya hai apne..apki rachna judai k dard ko siddat se ehsaas karati hai jaise kisi masoom panchi ko udne k liye saara aksh pada ho ..par kisi berahm ne uske pankho ki udaan khatam kar di ho..aur udasi aur dard uske naseeb ki mahroomiya ban gaye ho..kisi ne thik hi kaha hai LOVES HAPPENS ONLY ONCE REST IS ..."JUST LIFE" upke utkrist rachna k liye hardik dhanyavaad evm shubhkamnaye.ese hi likhte rahiye.

apke ujjwal bhavishya ki kamna k sath

Pratima.