आओ खोलें एक ऐसी दूकान,
Thursday, August 26, 2010
आओ खोलें एक ऐसी दूकान, जहाँ पागलपंथी हो सामान..
आओ खोलें एक ऐसी दूकान,
Wednesday, July 14, 2010
नीद थी तू कहा मै तड़पता रहा

ऐय भिस्ती ज़रा एक बूँद पिला ,
Friday, June 18, 2010

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Sunday, May 9, 2010
सिर्फ माँ है और कोई नहीं
Monday, April 26, 2010
जितने मे मिलते है सपने ,उतने जेब मे दाम कहाँ

बचपन के यादो मे जीता ,जीवन एक तन्हाई है ,
