Saturday, May 29, 2010

उसकी कमी खलती रहेगी


आज यूँ ही कोंई छोड गया अधूरे सपनो के साथ ,
आखो मे आसूंवों का सयलाब और मै उन्हें छुपाने को बेताब
चेहरे पर कई सवाल और एक सुर्ख निराशा ,
आखों के सामने घूमता वो यादों का मंजर ,
वो हर बात पर लड़ना उसका और
अपने बात पर अड़े रहना उसका ,
वो दादी -नानी की तरह हर बात का जबाब ,
वो उसका हर बात पर दिल तोडना ,
मेरा हर बार उसे मजबूती से जोड़ना ,
वो हर दिन मेरे जाहेन में समता उसका चेहरा
आज मेरी आसूंवों की बाढ़ भी खोने का नाम नहीं ले रहा ,
ये तो जिन्दगी है कटती रहेगी पर, हा उसकी कमी खलती रहेगी

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